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अथर्ववेद 30.1

स्वाक्तं॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी स्वाक्तं॑ मि॒त्रो अ॑कर॒यम्।
स्वाक्तं॑ मे॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॒ स्वाक्तं॑ सवि॒ता क॑रत् ॥१॥

पूरा अध्याय