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अथर्ववेद 12.4

यद् वो॒ मनः॒ परा॑गतं॒ यद् ब॒द्धमि॒ह वे॒ह वा॑ ।
तद् व॒ आ व॑र्तयामसि॒ मयि॑ वो रमतां॒ मनः॑ ॥४॥

पूरा अध्याय