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अथर्ववेद 115.4

ए॒ता ए॑ना॒ व्याक॑रं खि॒ले गा विष्ठि॑ता इव ।
रम॑न्तां॒ पुण्या॑ ल॒क्ष्मीर्याः पा॒पीस्ता अ॑नीनशम् ॥४॥

पूरा अध्याय