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अथर्ववेद 91.2

न्य॑१ग्वातो॑ वाति॒ न्यऽक् तपति॑ सूर्यः॑ ।
नी॒चीन॑म॒घ्न्या दु॑हे॒ न्यऽग् भवतु ते॒ रपः॑ ॥२॥

पूरा अध्याय