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अथर्ववेद 71.1

यदन्न॒मद्मि॑ बहु॒धा विरू॑पं॒ हिर॑ण्य॒मश्व॑मु॒त गाम॒जामवि॑म्।
यदे॒व किं च॑ प्रतिज॒ग्रहाह॑म॒ग्निष्टद्धोता॒ सुहु॑तं कृनोतु ॥१॥

पूरा अध्याय