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अथर्ववेद 64.3

स॒मा॒नी व॒ आकू॑तिः समा॒ना हृद॑यानि वः ।
स॒मा॒नम॑स्तु वो॒ मनो॒ यथा॑ वः॒ सुस॒हास॑ति ॥३॥

पूरा अध्याय