ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 6सूक्त 6363.4अथर्ववेद 63.4संस॒मिद् यु॑वसे वृष॒न्नग्ने॒ विश्वा॑न्य॒र्यृ आ। इ॒डस्प॒दे समि॑ध्यसे॒ स नो॒ वसू॒न्या भ॑र ॥४॥पिछलापूरा अध्याय