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अथर्ववेद 58.1

य॒शसं॒ मेन्द्रो॑ म॒घवान् कृणोतु य॒शसं॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे।
य॒शसं॑ मा दे॒वः स॑वि॒ता कृ॑णोतु प्रि॒यो दा॒तुर्दक्षि॑णाया इ॒ह स्या॑म् ॥१॥

पूरा अध्याय