ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 6सूक्त 5050.2अथर्ववेद 50.2तर्द॒ है पत॑ङ्ग॒ है जभ्य॒ हा उप॑क्वस । ब्र॒ह्मेवासं॑स्थितं ह॒विरन॑दन्त इ॒मान् यवा॒नहिं॑सन्तो अ॒पोदि॑त ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय