ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 6सूक्त 44.3अथर्ववेद 4.3धि॒ये सम॑श्विना॒ प्राव॑तं न उरु॒ष्या ण॑ उरुज्म॒न्नप्र॑युछन्। द्यौ॒३ष्पित॑र्या॒वय॑ दु॒च्छुना॒ या ॥३॥पिछलापूरा अध्याय