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अथर्ववेद 21.3

रेव॑ती॒रना॑धृषः सिषा॒सवः॑ सिषासथ ।
उ॒त स्थ के॑श॒दृंह॑णी॒रथो॑ ह केश॒वर्ध॑नीः ॥३॥

पूरा अध्याय