ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 6सूक्त 1818.2अथर्ववेद 18.2यथा॒ भूमि॑र्मृ॒तम॑ना मृ॒तान्मृ॒तम॑नस्तरा । यथो॒त म॒म्रुषो॒ मन॑ ए॒वेर्ष्योर्मृ॒तं मनः॑ ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय