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अथर्ववेद 139.3

सं॒वन॑नी समुष्प॒ला बभ्रु॒ कल्या॑णि॒ सं नु॑द ।
अमूं च॒ मां च॒ सं नु॑द समा॒नं हृद॑यं कृधि ॥३॥

पूरा अध्याय