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अथर्ववेद 135.3

यद् गिरा॑मि॒ सं गि॑रामि समु॒द्र इ॑व संगि॒रः ।
प्रा॒णान॒मुष्य॑ सं॒गीर्य॒ सं गि॑रामो अ॒मुं व॒यम् ॥३॥

पूरा अध्याय