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अथर्ववेद 130.1

र॒थ॒जितां॑ राथजिते॒यीना॑मप्स॒रसा॑म॒यं स्म॒रः ।
देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु ॥१॥

पूरा अध्याय