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अथर्ववेद 111.2

अ॒ग्निष्टे॒ नि श॑मयतु॒ यदि॑ ते॒ मन॒ उद्यु॑तम्।
कृ॒णोमि॑ वि॒द्वान् भे॑ष॒जं यदानु॑न्मदि॒तोऽस॑सि ॥२॥

पूरा अध्याय