Utshovऐप डाउनलोड करें

अथर्ववेद 110.1

प्र॒त्नो हि कमीड्यो॑ अध्व॒रेषु॑ स॒नाच्च॒ होता॒ नव्य॑श्च सत्सि ।
स्वां चा॑ग्ने त॒न्वं पि॒प्राय॑स्वा॒स्मभ्यं॑ च॒ सौभ॑ग॒मा य॑जस्व ॥१॥

पूरा अध्याय