ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 6सूक्त 108108.2अथर्ववेद 108.2मे॒धाम॒हं प्र॑थ॒मां ब्रह्म॑ण्वतीं॒ ब्रह्म॑जूता॒मृषि॑ष्टुताम्। प्रपी॑तां ब्रह्मचा॒रिभि॑र्दे॒वाना॒मव॑से हुवे ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय