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अथर्ववेद 105.3

यथा॒ सूर्य॑स्य र॒श्मयः॑ परा॒पत॑न्त्याशु॒मत्।
ए॒वा त्वं कासे॒ प्र प॑त समु॒द्रस्यानु॑ विक्ष॒रम् ॥३॥

पूरा अध्याय