ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 6सूक्त 101101.3अथर्ववेद 101.3आहं त॑नोमि ते॒ पसो॒ अधि॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नि । क्रम॒स्वर्श॑ इव रो॒हित॒मन॑वग्लायता॒ सदा॑ ॥३॥पिछलापूरा अध्याय