ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 5सूक्त 2626.11अथर्ववेद 26.11इन्द्रो॑ युनक्तु बहु॒धा वी॒ऽर्याण्य॒स्मिन् य॒ज्ञे सु॒युजः॒ स्वाहा॑ ॥११॥पिछलाअगलापूरा अध्याय