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अथर्ववेद 18.7

श॒तापा॑ष्ठां॒ नि गि॑रति॒ तां न श॑क्नोति निः॒खिद॑म्।
अन्नं॒ यो ब्र॒ह्मणां॑ म॒ल्वः स्वा॒द्व॑१द्मीति॒ मन्य॑ते ॥७॥

पूरा अध्याय