ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 5सूक्त 1818.3अथर्ववेद 18.3आवि॑ष्टिता॒घवि॑षा पृदा॒कूरि॑व॒ चर्म॑णा । सा ब्रा॑ह्म॒णस्य॑ राजन्य तृ॒ष्टैषा गौर॑ना॒द्या ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय