ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 5सूक्त 1414.13अथर्ववेद 14.13अ॒ग्निरि॑वैतु प्रति॒कूल॑मनु॒कूल॑मिवोद॒कम्। सु॒खो रथ॑ इव वर्ततां कृ॒त्या कृ॑त्या॒कृतं॒ पुनः॑ ॥१३॥पिछलापूरा अध्याय