ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 4सूक्त 88.2अथर्ववेद 8.2अ॒भि प्रेहि॒ माप॑ वेन उ॒ग्रश्चे॒त्ता स॑पत्न॒हा। आ ति॑ष्ठ मित्रवर्धन॒ तुभ्यं॑ दे॒वा अधि॑ ब्रुवन् ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय