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अथर्ववेद 6.2

याव॑ती॒ द्यावा॑पृथि॒वी व॑रि॒म्णा यावत् स॒प्त सिन्ध॑वो वितष्ठि॒रे।
वाचं॑ वि॒षस्य॒ दूष॑णीं॒ तामि॒तो निर॑वादिषम् ॥२॥

पूरा अध्याय