ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 4सूक्त 66.2अथर्ववेद 6.2याव॑ती॒ द्यावा॑पृथि॒वी व॑रि॒म्णा यावत् स॒प्त सिन्ध॑वो वितष्ठि॒रे। वाचं॑ वि॒षस्य॒ दूष॑णीं॒ तामि॒तो निर॑वादिषम् ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय