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अथर्ववेद 30.5

अ॒हं रु॒द्राय॒ धनु॒रा त॑नोमि ब्रह्म॒द्विषे॒ शर॑वे॒ हन्त॒वा उ॑ ।
अ॒हं जना॑य स॒मदं॑ कृणोम्य॒हं॑ द्यावा॑पृथि॒वी आ वि॑वेश ॥५॥

पूरा अध्याय