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अथर्ववेद 18.8

अ॒प॒मृज्य॑ यातु॒धाना॒नप॒ सर्वा॑ अरा॒य्यः ।
अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॒ मृज्महे ॥८॥

पूरा अध्याय