ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 4सूक्त 1313.3अथर्ववेद 13.3आ वा॑त वाहि भेष॒जं वि वा॑त वाहि॒ यद्रपः॑ । त्वं हि वि॑श्वभेषज दे॒वानां॑ दू॒त ईय॑से ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय