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अथर्ववेद 9.5

दुष्ट्यै॒ हि त्वा॑ भ॒त्स्यामि॑ दूषयि॒ष्यामि॑ काब॒वम्।
उदा॒शवो॒ रथा॑ इव श॒पथे॑भिः सरिष्यथ ॥५॥

पूरा अध्याय