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अथर्ववेद 20.2

अग्ने॒ अच्छा॑ वदे॒ह नः॑ प्र॒त्यङ् नः॑ सु॒मना॑ भव ।
प्र णो॑ यच्छ विशां पते धन॒दा अ॑सि न॒स्त्वम् ॥२॥

पूरा अध्याय