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अथर्ववेद 2.4

व्याऽकूतय एषामि॒ताथो॑ चि॒त्तानि॑ मुह्यत ।
अथो॒ यद॒द्यैषां॑ हृदि तदे॑षां॒ परि॒ निर्ज॑हि ॥४॥

पूरा अध्याय