ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 3सूक्त 1717.4अथर्ववेद 17.4इन्द्रः॒ सीतां॒ नि गृ॑ह्णातु॒ तां पू॒षाभि र॑क्षतु । सा नः॒ पय॑स्वती दुहा॒मुत्त॑रामुत्तरां॒ समा॑म् ॥४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय