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अथर्ववेद 12.3

ध॒रु॒ण्य॒ऽसि शाले बृ॒हच्छ॑न्दाः॒ पूति॑धान्या ।
आ त्वा॑ व॒त्सो ग॑मे॒दा कु॑मा॒र आ धे॒नवः॑ सा॒यमा॒स्पन्द॑मानाः ॥३॥

पूरा अध्याय