अथर्ववेद 10.7
आ मा॑ पु॒ष्टे च॒ पोषे॑ च॒ रात्रि॑ दे॒वानां॑ सुम॒तौ स्या॑म ।
पू॒र्णा द॑र्वे॒ परा॑ पत॒ सुपू॑र्णा॒ पुन॒रा प॑त ।
सर्वान् य॒ज्ञान्त्सं॑भुञ्ज॒तीषमूर्जं॑ न॒ आ भ॑र ॥७॥
आ मा॑ पु॒ष्टे च॒ पोषे॑ च॒ रात्रि॑ दे॒वानां॑ सुम॒तौ स्या॑म ।
पू॒र्णा द॑र्वे॒ परा॑ पत॒ सुपू॑र्णा॒ पुन॒रा प॑त ।
सर्वान् य॒ज्ञान्त्सं॑भुञ्ज॒तीषमूर्जं॑ न॒ आ भ॑र ॥७॥