ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 9696.24अथर्ववेद 96.24अपे॑हि मनसस्प॒तेऽप॑ क्राम प॒रश्च॑र । प॒रो निरृ॑त्या॒ आ च॑क्ष्व बहु॒धा जीव॑तो॒ मनः॑ ॥२४॥पिछलापूरा अध्याय