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अथर्ववेद 96.18

ग्री॒वाभ्य॑स्त उ॒ष्णिहा॑भ्यः॒ कीक॑साभ्यो अनू॒क्याऽत्।
यक्ष्मं॑ दोष॒ण्य॑१मंसा॑भ्यां बा॒हुभ्यां॒ वि वृ॑हामि ते ॥१८॥

पूरा अध्याय