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अथर्ववेद 93.6

त्वमि॑न्द्रासि वृत्र॒हा व्य॑१न्तरि॑क्षमतिरः । उद् द्याम॑स्तभ्ना॒ ओज॑सा ॥६॥

पूरा अध्याय