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अथर्ववेद 92.5

अर्च॑त॒ प्रार्च॑त॒ प्रिय॑मेधासो॒ अर्च॑त । अर्च॑न्तु पुत्र॒का उ॒त पुरं॒ न धृ॒ष्ण्वऽर्चत ॥५॥

पूरा अध्याय