ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 9292.2अथर्ववेद 92.2आ ह॑रयः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ । यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय