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अथर्ववेद 85.1

मा चि॑द॒न्यद् वि शं॑सत॒ सखा॑यो॒ मा रि॑षण्यत ।
इन्द्र॒मित् स्तो॑ता॒ वृष॑णं॒ सचा॑ सु॒ते मुहु॑रु॒क्था च॑ शंसत ॥१॥

पूरा अध्याय