ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 8080.1अथर्ववेद 80.1इन्द्र॒ ज्येष्ठं॑ न आ भ॑रं॒ ओजि॑ष्ठं॒ पपु॑रि॒ श्रवः॑ । येने॒मे चि॑त्र वज्रहस्त॒ रोद॑सी॒ ओभे सु॑शिप्र॒ प्राः ॥१॥अगलापूरा अध्याय