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सूक्त 79

79.1

इन्द्र॒ क्रतुं॑ न॒ आ भ॑र पि॒ता पु॒त्रेभ्यो॒ यथा॑ ।
शिक्षा॑ णो अ॒स्मिन् पु॑रुहूत॒ याम॑नि जी॒वा ज्योति॑रशीमहि ॥१॥

79.2

मा नो अज्ञा॑ता वृ॒जना॑ दुरा॒ध्यो॒३माशि॑वासो॒ अव॑ क्रमुः ।
त्वया॑ व॒यं प्र॒वतः॒ शश्व॑तीर॒पोऽति॑ शूर तरामसि ॥२॥

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