ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 7474.5अथर्ववेद 74.5समि॑न्द्र गर्द॒भं मृ॑ण नु॒वन्तं॑ पा॒पया॑मु॒या। आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय