ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 7373.3अथर्ववेद 73.3प्र वो॑ म॒हे म॑हि॒वृधे॑ भरध्वं॒ प्रचे॑तसे॒ प्र सु॑म॒तिं कृ॑णुध्वम्। विशः॑ पू॒र्वीः प्र च॑रा चर्षणि॒प्राः ॥३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय