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अथर्ववेद 70.2

दे॒व॒यन्तो॒ यथा॑ म॒तिमच्छा॑ वि॒दद् व॑सुं॒ गिरः॑ । म॒हाम॑नूषत श्रु॒तम् ॥२॥

पूरा अध्याय