ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 6969.2अथर्ववेद 69.2यस्य॑ सं॒स्थे न वृ॒ण्वते॒ हरी॑ स॒मत्सु॒ शत्र॑वः । तस्मा॒ इन्द्रा॑य गायत ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय