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अथर्ववेद 64.3

त्वं हि शश्व॑तीना॒मिन्द्र॑ द॒र्ता पु॒रामसि॑ । ह॒न्ता दस्यो॒र्मनो॑र्वृ॒धः पति॑र्दि॒वः ॥३॥

पूरा अध्याय