ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 6262.5अथर्ववेद 62.5इन्द्रा॑य॒ साम॑ गायत॒ विप्रा॑य बृह॒ते बृ॒हत्। ध॒र्म॒कृते॑ विप॒श्चिते॑ पन॒स्यवे॑ ॥५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय