ग्रंथअथर्ववेदकाण्ड 20सूक्त 6262.2अथर्ववेद 62.2उप॑ त्वा॒ कर्म॑न्नू॒तये॑ स नो॒ युवो॒ग्रश्च॑क्राम॒ यो धृ॒षत्। त्वामिद्ध्य॑वि॒तारं॑ ववृ॒महे॒ सखा॑य इन्द्र सान॒सिम् ॥२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय